केवल गुरबाणी से मार्गदर्शन लेने की आवश्यकता (Shri Guru Amar Das Ji) - Only Need to Take Guidance from Gurbani

केवल गुरबाणी से मार्गदर्शन लेने की आवश्यकता (Shri Guru Amar Das Ji)

गुरबाणी ही इस संसार में आत्मिक मार्ग को रोशन करने के लिए प्रकाश स्तंभ का काम करती है। Read more about केवल गुरबाणी से मार्गदर्शन लेने की आवश्यकता (Shri Guru Amar Das Ji)

अकालपुरख पर दृढ़ विश्वास अकालपुरख पर दृढ़ विश्वास (Shri Guru Amar Das Ji) - Akal Purakh Par Drdh Vishvas

अकालपुरख पर दृढ़ विश्वास (Shri Guru Amar Das Ji)

गुरू अमरदास जी ने सिखों को केवल मात्र एकाएक परमेश्वर का आश्रय लेने की हिदायत की है। परमेश्वर सर्वशक्तिमान है और उस के समान बड़ी और कोई हस्ती नहीं है। Read more about अकालपुरख पर दृढ़ विश्वास (Shri Guru Amar Das Ji)

परमेश्वर प्राप्ति के साधन (Shri Guru Amar Das Ji) - The Means of Obtaining God

परमेश्वर प्राप्ति के साधन (Shri Guru Amar Das Ji)

गुरु अमरदास जी ने परमेश्वर की प्राप्ति के लिए सीधा तथा सरल उपाय बताया है और अन्य सभी मनमती साधनों का खंडन किया हैं। Read more about परमेश्वर प्राप्ति के साधन (Shri Guru Amar Das Ji)

अहंकार (Shri Guru Amar Das Ji)

परमेश्वर प्राप्ति के लिए उच्च आत्मिक जीवन जीने के लिए। अहंकार रूपी विकार बहुत बड़ी रुकावट है। गुरु अमरदास जी कहते हैं। Read more about अहंकार (Shri Guru Amar Das Ji)

जैन धर्म - Cast of Jainism

जैन धर्म

‘अहिंसा परमो धर्मः’, यह जैनियों का मूल मंत्र है। जीव-हत्या इनके लिए महापाप है। कहा जाता है कि जब भारत में चारों ओर अँधेरा छाया हुआ था, लोग अशांत जीवन जी रहे थे, उसी समय उत्तर भारत में दो बालकों ने जन्म लिया था। Read more about जैन धर्म

Business and Technique

व्यापार एवं तकनीक

आज वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुसंधान के क्षेत्र में रोज आश्चर्यजनक उपलब्धियाँ सामने आ रही हैं और यदि इन अनुसंधानों के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखा जाए, तो ये मानवमात्र की निमित्त उपलब्धियाँ हैं। Read more about व्यापार एवं तकनीक

Bureaucracy in India Democracy

भारतीय लोकतंत्र में नौकरशाही

राजनीतिक व्यवस्था का स्वरूप चाहे लोकतंत्रात्मक हो अथवा तानाशाही, पूँजीवादी हो अथवा समाजवादी अथवा मिश्रित अर्थव्यवस्था वाला, सरकार की नीतियों को कार्य रूप देने का कार्य नौकरशाही द्वारा ही किया जाता है। Read more about भारतीय लोकतंत्र में नौकरशाही

श्री गुरु अंगद देव जी की जीवनी - Shri Guru Angad Dev Ji Introduction

श्री गुरु अंगद देव जी की जीवनी

श्री गुरु अंगद देव जी का पहला नाम भाई लहणा जी था। आप का प्रकाश (जन्म) 31 मार्च सन् 1504 (तदानुसार 5 बैसाख संवत् 1561) को ग्राम मत्ते की सराय, जिला फिरोजपुर, पंजाब में पिता फेरूमल जी व माता दया कौर जी के घर में हुआ।
Read more about श्री गुरु अंगद देव जी की जीवनी

गोइंदवाल की स्थापना तथा विकास - Establishment and Development of Goindwal

गोइंदवाल की स्थापना तथा विकास

क्षत्रीय जाति का गोइंदा व्यास नदी के किनारे, जहां दिल्ली में लाहौर जाने वाली शाही सड़क गुज़रती थी, एक नगर बसाना चाहता था। वह वहुत सी ज़मीन का मालिक था। Read more about गोइंदवाल की स्थापना तथा विकास

परिश्रम करने के सिद्धांत पर पहरा देना - Guard on the Principle of Diligence

परिश्रम करने के सिद्धांत पर पहरा देना

वास्तविकता यह है कि हम अभी तक अपने सतगुरू साहिबान का जीवन इतिहास में (द्वारा) ठीक ढंग से लोगों के सामने प्रस्तुत नहीं कर सके हैं। Read more about परिश्रम करने के सिद्धांत पर पहरा देना