भाई अजब जी तथा भाई अजायब जी

श्री गुरू अर्जुनदेव जी के दरबार में उनके मसंद (मिशनरी) अपने क्षेत्र से संगतों से ‘दसवंध’ की राशि एकत्रित करके लाये Read more about भाई अजब जी तथा भाई अजायब जी

भाई बाला जी व किशना जी

बाला व किशना दो विद्वान गुरू अर्जुन देव जी के अनन्य सिक्ख थे। यह गुरमति का प्रचार करने भिन्न भिन्न स्थानों पर जाते रहते थे और वहाँ गुरू शब्द की व्याख्या बहुत प्रभावशाली ढंग से करते थे। Read more about भाई बाला जी व किशना जी

सुलतानपुर की संगत

श्री गुरू अर्जुन देव जी के दरबार में सुलतानपुर से संगत गुरू दीक्षा लेने के लिए उपस्थित हुई। Read more about सुलतानपुर की संगत

भलो भलो रे कीरतनीआ

एक बार श्री गुरू अर्जुन देव जी के दरबार में भाई झंडू, भाई मुकंदा व भाई केदारा जी हाजिर हुए। उन्होंने गुरूदेव जी से पूछा कि हम किस प्रकार का जीवन जियें ताकि हमारा इस जन्म में उद्धार हो सके। Read more about भलो भलो रे कीरतनीआ

षड्यंत्र की परिभाषा

विपक्ष को हानि पहुँचाने का एक योजनाबद्ध कार्यक्रम, जिस का रहस्य कोई न जान सके, बल्कि पीड़ित पक्ष किसी अन्य को अपराध मानने लग जाये। Read more about षड्यंत्र की परिभाषा

शहीद की परिभाषा

जो मनुष्य लगातार चुनौती देने पर भी अपने आदर्श पर दृढ़ता से डटा हुआ अपने प्राणों की आहुति दे दे अथवा बलिदान हो जाए किन्तु अपनी धारणा में परिवर्तन न लाए, ऐसे बलिदानी पुरुष को शहीद कहते हैं। Read more about शहीद की परिभाषा

गुरु अर्जन देव जी षड्यंत्र के शिकार और शहीदी

मुगल शहनशाह (सम्राट) अकबर अपने अन्तिम दिनों में अपने पोते खुसरो को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहता था, जब कि उसका अपना पुत्र शहजादा सलीम (जहाँगीर) जो कि बहुत बड़ा शराबी था, वह भी हर परिस्थिति में सिहांसन प्राप्त करना चाहता था। Read more about गुरु अर्जन देव जी षड्यंत्र के शिकार और शहीदी

तुज़ाकि जहाँगीरी नामक रोज़नामचे की इबारत

गोइंदवाल जो, ब्यास नदी के किनारे पर स्थित है, में पीरों बजुर्गों की वेष- भूषा में (गुरू) अरजन नामक एक हिन्दू निवास करता है। Read more about तुज़ाकि जहाँगीरी नामक रोज़नामचे की इबारत