श्री गुरु हरगोबिन्द जी - Shri Guru Hargobind Sahib Ji

बाबा श्री चन्द जी से भेंट (Shri Guru Hargobind Ji)

श्री गुरू हरिगोविन्द जी दूसरे युद्ध में विजयी होने के पश्चात् प्रचार दौरे के अन्तर्गत विचरण कर रहे थे तो उन्हें बताया गया कि निकट ही बाट नामक ग्राम हैं, Read more about बाबा श्री चन्द जी से भेंट (Shri Guru Hargobind Ji)

श्री गुरु हरगोबिन्द जी - Shri Guru Hargobind Sahib Ji

बुढण शाह (Shri Guru Hargobind Ji)

श्री हरिगाविन्द साहब जी ने अपने बड़े बेटे (बाबा) गुरूदित जी को आदेश दिया कि आप हिमालय पर्वत की तराई के क्षेत्रा में एक नगर बसाओ और वहीं आगामी जीवन में निवास स्थल बनाओ। Read more about बुढण शाह (Shri Guru Hargobind Ji)

श्री गुरु हरगोबिन्द जी - Shri Guru Hargobind Sahib Ji

शाही सेना के साथ चौथा और अन्तिम युद्ध (Shri Guru Hargobind Ji)

पिछले अध्यायों में आप पैंदे खान का विवरण पढ़ चुके हैं कि श्री गुरू हरिगोवन्दि साहब जी ने इस अनाथ किशोर को अपनी सेना में भर्ती कर लिया था। Read more about शाही सेना के साथ चौथा और अन्तिम युद्ध (Shri Guru Hargobind Ji)

श्री गुरु हरगोबिन्द जी - Shri Guru Hargobind Sahib Ji

गुरू सुपुत्रा श्री गुरूदिता जी का निधन (Shri Guru Hargobind Ji)

बाबा गुरूदिता जी ने पिता श्री गुरूहरिगोविन्द जी के आदेश अनुसार उनके बताये गये स्थल पर एक सुन्दर नगर का निर्माणप्रारम्भ कर दिया और इस नगर का नाम गुरूआज्ञा से कीरतपुर रखा। Read more about गुरू सुपुत्रा श्री गुरूदिता जी का निधन (Shri Guru Hargobind Ji)

श्री गुरु हरगोबिन्द जी - Shri Guru Hargobind Sahib Ji

नरेश हरिसैन

श्री गुरू हरिगोविन्द के दरबार कीरतपुर में हिमाचल प्रदेश के जिला मण्डी क्षेत्रा का नरेश हरिसैन गुरू स्तुति सुनकर दर्शनों को आया। गुरू दरबार में उस समय कीर्तनी जत्था शब्द गायन कर रहा था – Read more about नरेश हरिसैन

श्री गुरु हरगोबिन्द जी - Shri Guru Hargobind Sahib Ji

भाई भैरों जी

श्री गुरू हरिगोविन्द साहब अपने जीवन के अन्तिम दिनों में कीरतपुर क्षेत्रा में रहने लगे थे। यह नगर आप के बड़े सुपुत्रा श्री गुरूदिता जी ने बसाया था। Read more about भाई भैरों जी

श्री गुरु हरगोबिन्द जी - Shri Guru Hargobind Sahib Ji

पौत्रा हरिराय जी को गुरुगद्दी सौंपना

श्री गुरू अरजन देव जी का प्रकाश (जन्म) संवत 1620 की 3 बैशाख तदानुसार 15 अप्रैल सन् 1563 को गोइंदवाल नामक स्थान पर श्री गुरू रामदास जी के गृह श्रीमती भानी जी के उदर से हुआ। Read more about पौत्रा हरिराय जी को गुरुगद्दी सौंपना

श्री गुरु अर्जुन देव जी की जीवनी (Shri Guru Arjan Dev Ji) - Shri Guru Arjan Dev Ji Introduction

श्री गुरु अर्जुन देव जी की जीवनी (Shri Guru Arjan Dev Ji)

श्री गुरू अरजन देव जी का प्रकाश (जन्म) संवत 1620 की 3 बैशाख तदानुसार 15 अप्रैल सन् 1563 को गोइंदवाल नामक स्थान पर श्री गुरू रामदास जी के गृह श्रीमती भानी जी के उदर से हुआ। Read more about श्री गुरु अर्जुन देव जी की जीवनी (Shri Guru Arjan Dev Ji)

श्री गुरु अर्जुन देव जी - गुरु गद्दी की प्राप्ति - Receiving Shri Guru Arjun Dev Ji Guru Gaddi

श्री गुरु अर्जुन देव जी – गुरु गद्दी की प्राप्ति (Shri Guru Arjan Dev Ji )

इस बार सावधानी पूर्वक संदेशवाहक ने पृथीचंद की दृष्टि बचाकर तीसरा पत्र श्री गुरू राम दास जी के हाथों में सजे हुए दरबार में दे दिया। Read more about श्री गुरु अर्जुन देव जी – गुरु गद्दी की प्राप्ति (Shri Guru Arjan Dev Ji )

भट्ट कवियों का गुरू दरबार में आगमन (Shri Guru Arjan Dev Ji) - Bhat Poets Arrive in Guru Court

भट्ट कवियों का गुरू दरबार में आगमन (Shri Guru Arjan Dev Ji)

श्री गुरू राम दास जी के निधन का समाचार फैलते ही संगत दूर-दराज के क्षेत्रों से उनकी तेहरवी के समारोह में सम्मिलित होने गोईदवाल एकत्र होने लगी, इन संगत के मुखी जनों के साथ कुछ भट्ट विद्वानों की भेंट हो गई। Read more about भट्ट कवियों का गुरू दरबार में आगमन (Shri Guru Arjan Dev Ji)